आप सभी को पता की होगा की महादेव के कई अवतार है। जिसमे से एक अवतार में महादेव नृत्य की मुद्रा में खड़े है। महादेव के इस स्वरूप को नटराज के नाम से जान जाता है, किंतु क्या आपको
महादेव के नटराज स्वरूप का उद्देश्य ज्ञात है? आखिर क्यों लिया था महादेव ने यह स्वरूप आइए जानते है -
महादेव के नटराज स्वरूप का उद्देश्य
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| शिव जी की फोटो |
बहुत समय पूर्व तारगम के शांत वन में कुछ साधु रहते थे। वे सभी बहुत ही ज्ञानी और विद्वान थे। एक बार उन सभी साधुओं को अपने ज्ञान और विद्या पर इतना अहंकार हो जाता है, कि वे हर जीव को तुच्छ समझने लगते हैं। वे सभी अपने ज्ञान और विद्या का दुरुपयोग करने लगते है तथा आस पास के रहने वाले लोगो को परेशान करने लगते है। जब उन
साधुओं का अहंकार बहुत अधिक बढ़ जाता है तब शिव जी उनके इस अहंकार को तोड़ने के लिए एक गरीब व्यक्ति का रूप धरकर वहां पहुंचते है। सभी साधु अपने अहंकार में इतना लिप्त हो चुके थे की वे महादेव को पहचान नहीं पाए, और उनके साथ परिहास करने लगे, सभी साधुओं ने उन्हे तुच्छ समझकर उनका अपमान किया। महादेव तब भी शांत रहे जिसके बाद अहंकार में चूर साधुओं ने शिव जी पर सर्पों से हमला किया, लेकिन शिव जी ने सर्पों को कंठाहार बना लिया। यह देख साधुओं के क्रोध की कोई सीमा न रही क्रोधित साधुओं ने अपनी शक्तियों से अपस्मार नामक राक्षस को उत्पन्न किया। लेकिन महादेव ने उसे अपने पैरों तले रौंद दिया, और फिर
नटराज बनकर, उसके शव पर नृत्य करने लगे। यह देख सभी साधुओं का अहंकार टूट जाता है और वे सभी महादेव से क्षमा मांगते है। इस प्रकार शिव जी की महिमा ने साधुओं का अहंकार तोड़ दिया। तभी से
नटराज का स्वरूप अज्ञान और अहंकार का विनाशक माना जाता है।
नटराज स्वरूप का वर्णन
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| नटराज का स्वरूप |
नटराज शिव के इस स्वरूप में चार भुजाएं है। एक हाथ में डमरू जिसकी ध्वनि सृजन का प्रतीक है तो दूसरे हाथ में अग्नि है जो विनाश का प्रतीक है। एक हाथ अभय मुद्रा में है जो निर्भयता का प्रतीक है तथा पैरो तले एक दानव है जो अज्ञानता और अहंकार का प्रतीक माना जाता है। इनके चारो ओर अग्नि के घेरे है।