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| नारियल का महत्व |
नारियल का महत्व
नारियल का पूजा में एक विशेष महत्व है, जिसके पीछे अनेक मान्यताएं है।- एक पौराणिक मान्यता ने अनुसार जब भगवान विष्णु मां लक्ष्मी के साथ धरती पर अवतरित हुए थे, तो कामधेनु गाय और नारियल वृक्ष को साथ लेकर आए थे। इसीलिए नारियल वृक्ष को कल्पवृक्ष भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है की नारियल के वृक्ष में त्रिदेवो का वाश होता है। नारियल में बने छेद की तुलना तो शिव जी के नेत्रों से की जाती है।
- इसके पीछे एक और मान्यता यह भी है, की एक बार ऋषि विश्वामित्र इंद्र से रूष्ट हो जाते है, और वे एक अलग स्वर्ग लोक का निर्माण करने का निस्चय करते थे। दूसरे स्वर्ग का निर्माण करते वक्त उन्होंने मानव के रूप में नारिया का निर्माण किया था।
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मंदिर में नारियल चढ़ाने का क्या महत्व है
मंदिर में नारियल चढ़ाने के पीछे एक और कहानी प्रचलित है जिसके अनुसार पूर्व समय में बहुत सी जगहों पर कोई भी शुभ काम करने से पहले नरबली की अवांछनीय घटना प्रचलित थी। तब आदि शंकराचार्य ने इसकी कठोर निंदा की। क्योंकि इसके साथ दर्द और नकारात्मकता जुड़ी थी और इसका कोई आध्यात्मिक प्रयोजन नहीं था। इसीलिए लोगो ने नरबली के स्थान पर नारियल चढ़ाना शुरू किया क्योंकि नारियल कई मायनों में मानव सिर जैसा है। इसका बाहरी आवरण कठोर होता है, जो मनुष्य की खोपड़ी के समान है। नारियल, भगवान को चढ़ाए जाने वाले सभी प्रसादो में सबसे शुद्ध प्रसाद माना जाता है, क्योंकि इसके बाहरी कठोर सतह के कारण अंदर की गरी तथा पानी शुद्ध रहता है। भगवान के सामने नारियल फोड़ना अपने अंदर के अहंकार को तोड़ने का प्रतीक माना जाता है, जो हमारे पूर्ण समर्पण को दर्शाता है।
