धनतेरस क्यों मनाया जाता है
धनतेरस पर्व समुद्र मंथन की कहानी से जुड़ा है। समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से एक रत्न धनवंतरी जी थे जो अमृत कलश को लेकर प्रकट होते है। धनवंतरी जी को देवो के वैद्य का पद प्राप्त होता है और जब पृथ्वी पर मनुष्य रोगों से अत्यन्त पीड़ित हो गए तो इन्द्र ने धन्वन्तरि जी से प्रार्थना की की वह पृथ्वी पर अवतार लेंl इन्द्र की प्रार्थना स्वीकार कर भगवान धन्वन्तरि ने काशी के राजा दिवोदास के रूप में पृथ्वी पर अवतार धारण किया इनके द्वारा रचित "धन्वन्तरि-संहिता" आयुर्वेद का मूल ग्रन्थ है। आयुर्वेद के आदि आचार्य सुश्रुत मुनि ने धन्वन्तरि जी से ही इस शास्त्र का उपदेश प्राप्त किया था इसीलिए इन्हें सर्वप्रथम वैद्य का पद प्राप्त है । धनवंतरी जी कार्तिक माह की त्रियोदसी तिथि को समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन नए बर्तन, सोना चांदी आदि वस्तुएं खरीदने का महत्व है। हम अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए इस दिन धनवंतरी जी की पूजा कर धनतेरस का पर्व मनाते है। इस दिन मां लक्ष्मी और कुबेर जी की भी पूजा की जाती है।![]() |
| धनतेरस फोटो |
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धनतेरस पर्व का महत्व
एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार यमराज ने अपने यमदूतों से पूंछा की आप सब के प्राण हरते क्या कभी ऐसा हुआ है की किसी के प्राण हारते समय तुम्हे दया आई हो तब यम दूत कहते है की महराज हम तो आपके दिए आदेश का पालन करते है। तब यमदेव कहते है कि क्या कभी भी किसी घटना से विचलित नहीं हुए । तब यमदूत कहते है की महराज एक बार की बात है एक राजा के यहां एक पुत्र ने जन्म लिया। राज पुरोहित ने कहा की महाराज आपके पुत्र को विवाह दोष है जिस कारण वह विवाह के 4 दिन बाद ही मर जायेगा। यह सुनकर राजा दुखी हो जाते है और उसे एक दूर आश्रम में रखते है जहा स्त्री की परछाई भी उसपे न पड़े किंतु कुछ वर्षो के पस्चात पड़ोस देश की राजकुमारी भ्रमण करने निकलती है और वह रास्ता भटक कर वही पहुंच जाती है जहा राजकुमार होते है। कुछ समय बिताने के पश्चात दोनो में प्रेम हो जाता है और दोनो विवाह कर लेते है। दोष के कारण चार दिन बाद राजकुमार की मृत्यु हो जाती है। उस दिन उसकी पत्नी की करुण पुकार से मन विचलित हो उठा। तब चित्रगुप्त जी पूछते है, महाराज! क्या अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय नहीं है? तब यमराज कहते है की धनतेरस के दिन देववैद्य धनवंतरी जी की पूजा करने से अकाल मृत्यु के दोष से मुक्ति मिलती है। इसलिए धनतेरस के दिन धनवंतरी जी की पूजा करनी चाहिए। बहुत सी जगह पर धनवंतरी जी के साथ यमदेव की भी पूजा की जाती है।आप को यह जानकारी कैसी लगी कॉमेंट करके जरूर बताएं। हम हिंदू धर्म से जुड़ी ऐसी ही जानकारी लाते रहेंगे इसलिए हमसे जुड़े रहे और सनातन धर्म और संस्कृति के बारे में जाने। यदि आपको कुछ और इसके बारे ज्ञात है तो शेयर जरूर। धन्यवाद
